मानव जीवन के लिए योग कितना जरूरी है
अष्टांग योग का प्रारंभ
योग को पूर्णत्व के रूप में समझना चाहिए कि योग ही शक्ति है और शक्ति ही योग है।#yoga go login
'योग ही जीवन है ,
वियोग ही मृत्यु है।
कुंडलिनी का जागरण ही ,
जीवन की मुक्ति है।।'#aerial yoga near me
जड़-चेतन-जीव तथा इस संपूर्ण सृष्टि का और इस सृष्टि की जननी माता आदि शक्ति जगत जननी जगदंबे का संबंध ही योग है। सृष्टि का प्रारंभ ही जगत जननी ने योग बल से किया है। अतः जब से यह सृष्टि है ,तभी से योग है।#aerial yoga near me
अष्टांग योग की मूल शक्ति कौन?
योग की मूल शक्ति माता आदि शक्ति जगत जननी जगदंबा है, उसके देव ब्रह्मा-विष्णु -महेश है और ऋषि श्रेष्ठ स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज हैं। सृष्टि के प्रारंभ से लेकर अब तक हर काल परिसती में योग किसी न किसी रूप में मानव जीवन में समाहित रहा है। अनेक और ऋषि मुनियों ने योग को अपने-अपने तरीके से स्थापित किया है मगर उसका मूल स्वरूप लगभग एक समान ही रहा है। महर्षि पतंजलि ने योग को व्यापकता प्रदान की ,जो वर्तमान समय में मुख्य रूप से प्रचलित है। कुंडलिनी के सातों चक्रों को जागृत करके तथा आत्म चेतना को प्राप्त करके आत्मा की जननी मूल सत्ता से एकाकर करना योग है।#beginner yoga classes near me
"योग का स्वरूप व्यापक है, मगर उसके मूल सार को अष्टांग योग में पिरोने प्रयास किया गया है जो प्रवाह के रूप में जन-जन तक पहुंच रहा है।# "yoga near me for seniors
वर्तमान काल में मनुष्य विषम परिस्थितियों से बाहर कैसे निकलेगा#somatic yoga near me
वर्तमान काल में मनुष्य जिन विषम परिस्थितियों में घिर चुका है, उनमें अष्टांग योग सबसे सशक्त माध्यम है। 21वीं सदी को यदि योग व आध्यात्मिक की सदी कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। वर्तमान में संपूर्ण विश्व में सैकड़ो धार्मिक संस्थाओं से योग का प्रभाव जनमानस तक पहुंच रहा है।#chair yoga near me
योग पथ पर चलने के लिए आवश्यक सावधानियाँ और चेतनावान गुरु की आवश्यकता
योग पथ पर चलने के लिए योग के प्रति पूर्ण निष्ठा ,विश्वास और समर्पण की आवश्यकता होती है। स्वयं के द्वारा स्वयं की प्रति वचनबद्धता के साथ ही एक योग चेतनवान गुरु की आवश्यकता होती है, जो योग में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे मनुष्य की आयु व उसकी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार उचित मार्गदर्शन कर सके।
#beginning yoga near me


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें